पटना / सिवान। बिहार में बाढ़ का संकट गंभीर बना हुआ है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार सोमवार को राज्य के 15 जिलों में करीब 49.36 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए।
प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं।
कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कोसी बालतारा और कुरसेला में, बूढ़ी गंडक खगड़िया में, गंगा दीघा, गांधी घाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में खतरे से ऊपर बताई गई। पुनपुन श्रीपालपुर में, बागमती बेनीबाद में और घाघरा दरौली में भी खतरे के निशान से ऊपर दर्ज की गई।
भागलपुर के सुल्तानगंज में सोमवार सुबह गंगा 36.21 मीटर पर बह रही थी, जो खतरे के स्तर से 1.71 मीटर ऊपर है।
राहत कार्य जारी हैं। प्रशासन बाढ़ प्रभावित इलाकों में करीब 1,260 सामुदायिक रसोई और 13 राहत शिविर चला रहा है। करीब 11,060 लोगों के लिए आवास, भोजन और चिकित्सा व्यवस्था बताई गई है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की 27 और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की 10 टीमें राहत-बचाव में तैनात हैं।
वहीं केंद्र सरकार ने भी सक्रियता बढ़ाई है। गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बात की और बताया कि क्षति का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम राज्य आएगी। टीम का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। मुख्यमंत्री ने नेपाल से आने वाले पानी को बिहार में बार-बार बाढ़ का बड़ा कारण बताया है।
स्थानीय मौसम कार्यालय के अनुसार सितंबर में अब तक बिहार में 111.7 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब 13 प्रतिशत अधिक है।
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