जिले में लगातार हो रही बारिश से किसानों की बढ़ी मुश्किलें

  • मौसम के जानकारों का मानना है कि पूरे जिले में एक-दो दिनों तक और बारिश होने की उम्मीद है
  • खेतों में जल-जमाव होने से कई जगहों पर गिरी धान की फसल
  • दो-तीन तक यहीं स्थिति रही तो पिछड़ सकती है गेहूं की बुआई
  • 70 एमएम तक शुक्रवार की सुबह के 8 बजे तक हुई थी बारिश
  • 10-12 दिनों में धान की कटनी की कई जगहों पर होगी शुरूआत

परवेज अख्तर/सिवान: जिले में गुरुवार की रात से ही लगातार हो रही बारिश, थमने का नाम नहीं ले रही है। इससे खेतों में पानी लबालब भर गए हैं। कई स्थानों पर फसल के गिर जाने से उनके नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। बारिश के न थमते देख किसानों की धड़कनें भी बढ़ने लगी है। इस बात को लेकर चिंता सताने लगी है। डर है कि बारिश का कहर इसी तरह दो-तीन दिनों तक जारी रहा तो इससे फायदा की जगह, उन्हें नुकसान न उठाना पड़े। निचले इलाकों में जलजमाव की वजह से धान की फसल पहले ही गवां चुके किसान अब रबी की फसल को लेकर चिंतित होने लगे हैं। किसानों को सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि समय रहते खेत से जलजमाव खत्म नहीं हुआ तो गेहूं की बुआई में समस्या आ सकती है। मौसम के जानकारों का मानना है कि जिले में एक-दो दिनों तक और बारिश होने की उम्मीद है। चक्रवाती तूफान का असर जिले के मौसम पर भी पड़ा है। हालांकि, आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा ब्रजपात संबंधित जारी पत्र में जिले का नाम नहीं है। लेकिन, किसानों का मानना है कि हथिया नक्षत्र में इस तरह की बारिश होना कोई नई बात नहीं है। इधर कृषि विज्ञान केन्द्र का कहना है कि इस बारिश से किसानों को फायदा ही है, कोई विशेष नुकसान नहीं है। जबकि किसानों का कहना है कि इससे हमें नुकसान के अलावा फायदा ही क्या है। खेत में नमी इतनी पहले ही से थी कि धान की कटनी करके गेहूं की रोपनी की जा सकती थी।

बारिश और हवा से धान की फसल गिरी

लगातार हो रही बारिश से धान की फसल को काफी क्षति होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इस बात को लेकर निराश किसानों के पास बचाव का कोई विकल्प भी नजर नहीं आ रहा है। धान फसल तो जमीन पर गिरे ही है, सब्जियों के फसल भी पानी में डूब गए हैं। इससे इन फसल पर कुप्रभाव पड़ना लाजमी है। गुरूवार की रात में हवा के साथ शुरू हुई बारिश से बालियों से लदे धान के पौधे कई जगहों पर गिर पड़े हैं। कुछ जगहों पर तो रेंड़ा ले चुके धान भी गिरे हुए दिखें। किसान नेता रत्नेश्वर सिंह ने कहा कि बारिश के साथ तेज हवाएं रात की तरह ही चली तो फसल को बचाना मुश्किल हो जाएगा। जिले में अबतक एक चौथाई किसानों की फसल पककर तैयार है। रोपनी के 80 फीसदी फसल से बालियां निकल चुकी हैं। रघुनाथपुर के किसान बड़ाई भगत व नवल किशोर राय ने कहा कि अभी बारिश की कोई जरूरत नहीं थी। धान के खेतों में इतना पहले से ही मौजूद था कि इसकी कटनी के बाद गेहूं की बुआई की जा सकती थी।

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