छपरा

गंभीर संकेतों के पहचान से नवजात मृत्यु दर में कमी संभव, एसएनसीयू में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध

  • फैसिलिटी एवं समुदाय स्तर पर नवजात के लिए कई सुविधाएँ
  • नवजातों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए बीमारी की जानकारी जरुरी

छपरा: वैश्विक महामारी कोरोना संकट काल में भी नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ख्याल रखा जा रहा है। सही समय पर उचित स्वास्थ्य सुविधा के आभाव में नवजात को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। नवजात में होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं की समय पर पहचान कर उन्हें सुरक्षित किया जा सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए फैसिलिटी एवं समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराये गए हैं, जिसमें सिक न्यू बोर्न यूनिट की भूमिका अहम है। नवजातों में होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं की पहचान कर उन्हें बचाया जा सकता है। इस दिशा में गृह आधारित नवजात देखभाल कार्यक्रम के तहत आशा घर-घर जाकर परिवार के लोगों को नवजात में होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं की जानकारी दे रही है। साथ ही जन्म के समय 1800 ग्राम या उससे कम वजन के नवजात एवं 34 सप्ताह से पूर्व जन्म लिए नवजातों को बेहतर देखभाल प्रदान करने के उद्देश्य से सभी जिला अस्पतालों में सिक न्यू बोर्न यूनिट(एसएनसीयू) की स्थापना की गयी है। इससे नवजातों को नया जीवनदान मिल रहा है।

डिस्चार्ज बच्चों का फोलोअप: जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम अरविन्द कुमार ने बताया कि एसएनसीयू से डिस्चार्ज होने के बाद भी कम वजन वाले बच्चों में मृत्यु का अधिक ख़तरा रहता है। स्वस्थ नवजात की तुलना में जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों में कुपोषण के साथ मानसिक एवं शारीरिक विकास की दर प्रारंभ से उचित देखभाल के आभाव में कम हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए नवजात के डिस्चार्ज होने के बाद भी उनका नियमित फोलोअप किया जाता है। इसके लिए आशाएं शिशुओं को 3 माह से 1 वर्ष तक त्रैमासिक गृह भ्रमण कर उनकी देखभाल करती हैं।

खुद जाने नवजात की समस्या: नवजात में होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं की सही समय पर जानकारी होना जरुरी है. इससे उनकी जान बचायी जा सकती है. नवजात की जटिलताओं को जानकर तुरंत आशा या एएनएम से संपर्क करना चाहिए या फिर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में नवजात को ले जाना चाहिए।

संकेतों को पहचानें

  • नवजात स्तनपान नहीं कर पा रहा हो
  • नवजात का शरीर अधिक ठंडा या गर्म हो गया हो
  • नवजात के शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही हो
  • नवजात को अचानक दौरे पड़ रहे हों

ऐसे बच्चे होते हैं एसएनसीयू में भर्ती

  • जन्म के समय 1800 ग्राम या उससे कम वजन के नवजात शिशु
  • 34 सप्ताह से पूर्व जन्म लिए नवजात शिशु
  • जन्म के समय या बाद में सांस नहीं ले पा रहे नवजात शिशु
  • स्तनपान करने में अक्षम बच्चे
  • गंभीर पीलिया से ग्रसित बच्चे
  • नवजात शिशु का शरीर नीला पड़ने, किसी भी अंग से रक्त स्त्राव होने एवं गंभीर दस्त से ग्रसित नवजात शिशु
  • जन्मजात विकृति से ग्रसित नवजात शिशु( होंठ कटा होना, तालू चिपका होना एवं हाथ या पैर टेढ़े होने पर)
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