रमजान में खुल जाते हैं जन्नत के दरवाजे, एक नेकी के बदले मिलता है 70 गुणा सवाब
परवेज अख्तर/सिवान: खुदा का पाक महीना है रमजान। इसमें दोखज के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। इसको रहमत, बरकत व मगफिरत का महीना भी कहा जाता है। सदर प्रखंड के मौला नगर मस्जिद के इमाम मो. अनवर आलम ने बताया कि पाक रमजान माह में एक नेकी का 70 गुणा सवाब मिलता है। उन्होंने कहा कि रोजा एक ऐसी इबादत है, इससे रोजेदार के अंदर मानवता का भाव पैदा होता है। बंदा पूरे दिन भूखा-प्यासा रहकर अल्लाह की इबादत में मशगूल रहता है। कहा कि रमजान अल्लाह की नेमत के साथ उसकी इबादत का जरिया है। रोजा सबको बुराइयों से दूर कर देता है। अल्लाह को राजी करना है तो अच्छाइयों को अपनाओ। जरूरतमंद की मदद करो। रोजा रखने से इंसान कई नेकियां कमाता है। इस्लाम नेक इंसान बनने की नसीहत देता है।
तीन लोगों की दुआएं नहीं होती है रद :
इमाम ने बताया कि पाक रमजान महीने में रब का इतना इनाम होता है कि बंदा गुमान भी नही कर सकता। अल्लाह इस महीने में रोजेदारों के चेहरे नूरानी कर देता है। उनपर रहमतों कि बारिश अता फरमाता है। रोज़ा रखना, सेहरी खाना, तरावीह और पांच वक्त की नमाज़ पढ़ना, सब्र करना, गुनाहों और बुराइयों से बचना, यह सब खैर व बरकत और रब की बारगाह में महबूब बनने के ज़रिए हैं। इस महीने में कई गुनाहगार जहन्नम से बच जाते हैं और अच्छे कर्म करने वालों को ढेरों इनाम मिलते हैं। रमजान के महीने में तीन लोगों की दुआएं रद नहीं होती हैं। एक रोजेदार की दुआ इफ़्तार के वक्त, दूसरा इंसाफ़ करने वाले बादशाह की दुआ, तीसरे मजलूम की दुआ। यह एक ऐसा मुबारक महीना है जिसमें दिन और रात दोनों ही फजीलत वाले हैं। इस महीने में हमें अधिक से अधिक पुण्य कार्य करने की भरपूर कोशिश करनी चाहिए। इस दौरान नमाज पाबंदी के साथ अदा करें। पड़ोसियों व गरीबों की मदद करें। किसी के लिए बुरा ना सोचना, बुरा ना बोलना, ईमानदारी, सच्चाई, संयम और भाईचारा, यही सब जीवन के लिए आवश्यक तत्व हैं। अल्लाह तआला हमें इस महीने में ख़ूब नेकी करने की तौफीक दे।