परवेज अख्तर/एडिटर इन चीफ :
राजद के पूर्व सांसद डॉ मोहम्मद शहाबुद्दीन का अंतिम संस्कार सीवान के हुसैनगंज थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव में नहीं हो पाएगा। कोर्ट ने शव को गांव ले जाने की इजाजत नहीं दी है। इसकी वजह से मोहम्मद शहाबुद्दीन के पार्थिव शरीर को दिल्ली स्थित एक कब्रितान में में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की संभावना है। हालांकि शव को गांव ले जाने के लिए परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
बतादें राजद के पूर्व सांसद डॉ. मोहम्मद शहाबुद्दीन का शनिवार की सुबह कोरोना से निधन हो गया था। इसकी पुष्टि कई घंटों के बाद तिहाड़ जेल प्रशासन ने की थी। यहां बताते चलें कि तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे शहाबुद्दीन को कोरोना संक्रमण के बाद दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने कोरोना से संक्रमित होने के बाद मोहम्मद शहाबुद्दीन को चिकित्सीय निगरानी और समुचित इलाज मुहैया कराने के लिए दिल्ली सरकार और तिहाड़ जेल प्रशासन को निर्देश दिया था।
बतादें कि पिछले साल सितंबर में पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के पिता शेख मोहमद हसीबुल्लाह (90 वर्ष) का निधन हो गया था। उस वक्त तिहाड़ से शहाबुद्दीन को पैरोल पर लाने की मंजूरी नहीं मिली थी। सिवान के चर्चित तेजाब हत्या कांड के मामले में तिहाड़ जेल में आजावीन कारावास की सजा काट रहे पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ तीन दर्जन से अधिक आपराधिक मामले चल रहे हैं। 15 फरवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें भागलपुर स्थित जेल से बहार आने के बाद तिहाड़ जेल लाने का आदेश दिया था।
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