परवेज अख्तर/सिवान: वैश्विक महामारी का संक्रमण थमने के बाद अब वायरल बुखार लोगों को परेशान करने लगा है। विशेषज्ञों की मानें तो प्राईवेट व सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वाले इस तरह के मरीजों की संख्या करीब पचास फीसदी तक बढ़ गयी है। वहीं जिले में सरकारी आंकड़े के अनुसार अभी किसी गंभीर मरीज मिलने की बात नहीं बतायी जा रही है। बावजूद इसके रहस्यमयी बुखार को लेकर स्वास्थ्य विभाग सजग है। इससे निपटने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बताया जाता है कि यूपी में रहस्मयी बुखार और उससे होने वाले मौत का आंकड़ा को देखकर यहां भी दस बेड का आक्सीजनयुक्त एक पीकू वार्ड तैयार कर दिया गया है। साथ ही व्यापक स्तर पर बेड बढ़ाने की बात की जा रही है। मच्छर जनित व जल जनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर जलजमाव वाले इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव व फॉगिंग को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग जल्द ही रहस्यमयी बुखार को लेकर आवश्यक सुझाव व उपाय बताकर लोगों में जागरूकता लाएगा। ज्यादा बीमार मिलने वाले मोहल्लों व गांवों को चिंहित कर वहां टीम भेजकर जांच कराने की भी बात बतायी जा रही है। वायरल बुखार को लेकर आज जिले में पटना से एक विशेष टीम आएगी। जो संक्रमण बढ़ने के कारणों व अन्य बिन्दुओं पर गहनता से पड़ताल करेगी।
पीएचसी स्तर पर भी लगाए जाएंगे दो बेड
वायरल फीवर के गंभीर रोगियों को लेकर सदर अस्पताल के अलावे प्रखंड स्तर पर भी स्वास्थ्य विभाग इंतजाम करेगा। बताया गया कि 10 बेड के ऑक्सीजनयुक्त पीकू वार्ड के अलावा सभी पीएचसी में दो-दो बेड लगाए जाएंगे। जहां रोगियों की संख्या बढ़ने पर आसानी से उन्हें दिया जा सकेगा। इसे लेकर विभाग की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशा प्रभावित इलाकों की करेंगी पहचान
बताया गया कि वायरल बुखार से प्रभावित जिले के सभी मुहल्लों व गांवों का पहले पहचान किया जाएगा। इस काम को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशा का सहयोग लिया जाएगा। चिंहित करने के बाद उन गांव मुहल्लों में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचकर जांच करेगी। इससे संक्रमण पर काबू पाने में काफी हद तक मदद मिलेगा।
दवा की कमी नहीं होने दी जाएगी
सिविल सर्जन ने बताया कि आने वाले संभावित वायरल फीवर से निपटने को लेकर पहले से ही स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। स्थिति नियंत्रण में रखने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। हालांकि अस्पताल में संबंधित बीमारी का इलाज का लेकर पर्याप्त दवाईयां उपलब्ध हैं। कमी पड़ने पर और दवाईयों की आपूर्ति की जाएगी। हर हाल में इलाज के दौरान किसी मरीज को दवा की किल्लत महसूस नहीं होने दी जाएगी।
ओपीडी में बढ़ी मरीजों की संख्या
मिली जानकारी के अनुसार इन दिनों सदर अस्पताल के ओपीडी में मरीजों की संख्या काफी बढ़ गयी है। बुधवार को सदर अस्पताल में विभिन्न बीमारियों से संबंधित करीब अस्सी बच्चों का इलाज किया गया। जिनमें से चालीस की संख्या के करीब वायरल बुखार से पीड़ित बताए जा रहे हैं। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर बैठा कर्मी ने बताया कि बीते महीने की अपेक्षा इन दिनों मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। पहले ओपीडी में रजिस्ट्रेशन कराने वालों की संख्या करीब चार सौ से पांच सौ होती थी वहीं इन दिनों सात सौ से भी अधिक हो जा रही है।
ये लक्षण दिखे तो फौरन अस्पताल पहुंचे
सिविल सर्जन ने बताया कि इन दिनों बच्चों में एईएस व चमकी बुखार के लक्षण पाए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि इसकी पहचाना करना आसान है। एईएस व चमकी बुखार और सामान्य बुखार में अंतर है। एईएस में बुखार में तीब्रता अधिक होती है। इसमें 103 से 104 डिग्री तक बुखार आ सकता है। इतना ही नहीं आम तौर पर दी जाने वाली दवाईयों से इसमें राहत नहीं मिलती है। चिड़चिड़ापन, हाथ-पैर में ऐंठन होना के लक्षण भी पाए जा सकते हैं। ऐसे में लक्षण की पहचान होने पर इलाज को लेकर फौरन नजदीकी अस्पताल पहुंचे।
सारण में तीन व गोपालगंज में एक बच्चे की मौत
यूपी में डेंगू, जपानी इंसेफ्लाईटिस, एईएस व चमकी बुखार के कहर के बाद अब धीरे-धीरे इधर पर इसके पैर फैलाने की सुगबुगाहट शुरू हो गयी है। मिली जानकारी के अनुसार आसपास के जिलों में वायरल बुखार अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वायरल बुखार के गंभीर मरीजों की सारण जिले में तीन जबकि गोपालगंज जिले में एक की मौत की खबर बतायी जा रही है। वहीं स्थानीय जिले के सदर अस्पताल में इलाजरत संभावित एक गंभीर मरीज के मिलने की चर्चा हो रही है।
डॉ. इस्त्राइल
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. इस्त्राइल ने बताया कि बच्चों में होने वाला वायरल फीवर काफी खतरनाक है। समय रहते इलाज नहीं मिला तो इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है। वायरल बुखार के दौरान एईएस व जपानी इंसेफ्लाईटिस दोनों के लक्षण देखे जा रहे हैं। इससे बच्चे के कोशिकाओं का क्षरण हो सकता है। बच्चे में चिड़चिड़ापन के साथ ही डिप्रेशन में जाने की भी बात बतायी जा रही है।
डॉ. पुनीत
डॉ. पुनीत ने बताया कि जरूरी नहीं है कि सभी वायरल फीवर जानलेवा ही साबित हो। कई बार मौसम परिवर्तन के कारण भी लोगों को फीवर हो जाता है। तापमान में बदलाव के कारण लोगों के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है जिसके कारण बुखार की बैक्ट्रीया आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। कई बार इसे समझने में देर कर देने से यह शरीर को पूरी तरह अपने चपेट में ले लेता है।
क्या कहते हैं सीएस
सीएस यदुवंश कुमार शर्मा ने बताया कि सरकारी आंकड़े के अनुसार अबतक जिले में वायरल बुखार से कोई गंभीर मरीज नहीं मिला है। हालांकि ऐसी स्थिति से निपटने को लेकर पहले से ही एक स्पेशल वार्ड बनकर तैयार है। जहां ऑक्सीजनयुक्त बेड की व्यवस्था की गयी है। साथ ही ऐसी व्यवस्था व्यापक स्तर पर भी करने की तैयारी चल रही है।
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