✍️परवेज़ अख्तर/एडिटर इन चीफ:
सदर अस्पताल को तोड़कर जब से माडल अस्पताल के रूप में विकसित किया जा रहा है तबसे यहां मिलने वाली कुछ सुविधाएं जैसे आइसीयू और बर्न केयर यूनिट की सेवा को बंद कर दिया है। आइसीयू के लिए जगह की तलाश अस्पताल प्रबंधन को है तो वहीं जले हुए मरीजों के इलाज की अलग व्यवस्था नहीं है। जनरल वार्ड में रखकर इनका इलाज किया जाता है। जबकि जले हुए मरीजों के लिए विशेष व्यवस्था की जरूरत होती है। जले मरीजों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है, इसलिए बर्न मरीजों के लिए बर्न यूनिट आवश्यक है। ऐसे मरीजों को असहनीय पीड़ा होती है इसलिए इनके वार्ड को वातानुकूलित बनाया जाता है लेकिन सदर अस्पताल में फिलहाल ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। बता दें कि विभिन्न गांवों सहित शहर से भी बर्न मरीजों को सदर अस्पताल ही लाया जाता है। जहां मरीज की स्थिति के अनुसार उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया जाता है।
नहीं है कोई विशेष व्यवस्था
विशेष व्यवस्था के तहत ऐसे मरीजों को मच्छरदानी की व्यवस्था दी जाती है लेकिन यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा जिस जनरल वार्ड में मरीजों को रखा जाता है वहां अन्य मरीजों व उनसे संबंधित लोगों की आवाजाही जूता चप्पल के साथ लगी रहती है। लोगों के प्रवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
कहते हैं अधिकारी
अभी जगह के अभाव में अलग बर्न वार्ड नहीं है, लेकिन पुरुष वार्ड में जले हुए मरीजों का इलाज किया जाता है। जहां उनको सभी तरह की सुविधा दी जाती है।
डा. अनिल कुमार भट्ट सिविल सर्जन
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