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छपरा: प्रारंभिक अवस्था मे ही बच्चों में टीबी की पहचान करना आवश्यक: सिविल सर्जन

  • राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चलंत चिकित्सा दलों को दिया गया प्रशिक्षण
  • सदर अस्पताल में शुरू हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • प्रत्येक बैच को दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन
  • अब टीबी व कुष्ठ मरीजों की पहचान करेंगे चिकित्सक

@संजीवनी रिपोर्टर
छपरा: कोरोना काल से राहत मिलने के बाद सभी स्कूल व आंगनबाड़ी केन्द्र खुलने के साथ ही आरबीएसके के टीक को भी स्क्रीनिंग के लिए सक्रिय किया जा रहा है। अब सभी स्कूलों व आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों की स्क्रीनिंग करने का निर्देश जारी कर दिया गया है।लेकिन स्क्रीनिंग के दायरे को इस बार बढ़ा दिया गया है। अब 0-18 साल के बच्चे में टीबी एवं कुष्ठ रोग तलाशने की जिम्मेवारी भी आरबीएसके के टीम को दी गई है। टीबी व कुष्ठ रोग की पहचान, उपचार व अन्य महत्वपूर्ण जानकारी से अवगत कराने के लिए सदर अस्पताल के सभागार में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।जिसमें मास्टर ट्रेनर डॉ. गुंजन कुमार व डॉ. विकास कुमार सिंह के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान टीबी व कुष्ठ रोग के लक्षण, प्रकार, जांच की विधि व अन्य प्रकार की जानकारी दी जानी है। पहले दिन टीबी रोग के बारे में प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही आबीएसके के ऐप के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। ताकि मरीज मिलने पर नाम, पता व अन्य संबंधित जानकारी लोड किया जा सके।

प्रारंभिक अवस्था मे ही बच्चों में टीबी की पहचान करना आवश्यक

सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्वर झा ने कहा 0-18 साल के बच्चो में सामान्य रोग की तरह टीबी की समस्या भी फैलती जा रही है। यह काफी चिंता की बात है। खासकर गरीब वर्ग के बच्चों में इसकी ज्यादा समस्या देखी जा रही है।इस रोग का सबसे बड़ा कारण रहन- सहन और खान-पान में अनियमितता है। बचाव के लिए पोषक तत्व के साथ पानी पर भी ध्यान दें। शरीर में कभी भी पानी की कमी होने न दें। जागरूकता और जानकारी के अभाव में भी लोग शुरुआती दौर में ही इसकी पहचान नही कर पाते हैं।जिसके कारण आगे चलकर यह गम्भीर रूप ले लेता है। उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रारंभिक अवस्था मे ही इसकी पहचान हो जाने से इसपर नियंत्रण में काफी साहूलियत होगी।

अपनी जिम्मेदारियों को निभाएं

आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कोरोना में आरबीएसके टीम का बहुत बड़ा सहयोग रहा है। जो जिम्मेवारी दी गई थी उसे बखूबी निर्वहन किया गया है। अब बच्चों में कुष्ठ एवं टीबी के मरीज भी खोजने की जिम्मेवारी दी जा रही है। उन्होने कहा प्रशिक्षण के दौरान दी जाने वाली जानकारी को अच्छी तरह समझें और जो भी समस्या लगती है उसका निदान भी प्रशिक्षण के दौरान ही कर लें ताकि स्क्रीनिंग के दौरान कोई परेशानी न हो।

टीबी उन्मूलन में आरबीएसके की सहभागिता जरूरी

जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम अरविन्द कुमार ने कहा टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए जो अभियान चलाया जा रहा है उसमें आरबीएसके के टीम की सहभागित बहुत जरूरी है। हलांकि जिला स्तर पर विभाग द्वारा मरीज खोजे जा रहे हैं लेकिन बच्चों में बढ़ रहे टीबी की समस्या को ढूंढने में परेशानी हो रही है। इसलिए आंगनबड़ी केन्द्र और स्कूलों में आपके द्वारा किए जाने वाले स्क्रीनिंग के दौरान अगर किसी बच्चे में टीबी या कुष्ठ रोग का लक्षण दिखता है तो उसकी सूचना पीएचसी या जिला स्तर पर जरूर दें।इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्वर झा, डीपीएम अरविन्द कुमार, डीपीसी रमेशचंद्र कुमार, डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह समेत अन्य मौजूद थे।

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