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बिहार में फार्मासिस्टों की अनदेखी से स्वास्थ्य व्यवस्था में बदहाली

पटना: बिहार के बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था से लगभग हर कोई परिचित है राजनेताओं द्वारा दवा वितरण से लेकर, ऑक्सिजन, कोविड के इलाज के लिए जरूरी दवाई की कालाबाजरी तक हमने देख लिया।

आखिर ऐसा क्यों??

बिहार राज्य में कई वर्षों से फार्मासिस्टो की अनदेखी की जा रही है, उनकी नियुक्ति नहीं हुई ।वैश्विक महामारी में जहां विश्व त्रस्त है वही फार्मासिस्ट चाह के भी अपनी सेवा नहीं दे पा रहे है। राज्य भर में पदस्थापित गिने चुने फार्मासिस्ट हैं उन्हें भी सरकार ने दवा वितरण केंद्र तक ही सीमित रखा है। जबकि ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 और पीपीआर 2015 के तहत फार्मासिस्ट सिर्फ दवा वितरण ही नहीं बल्कि फार्मा प्रैक्टिस , स्टॉक एंड सप्लाई चेन मैनेजमेंट, दवा का प्रभाव/दुष्प्रभाव का निरीक्षण, दवा की खुराक को निर्धारित करने में पूरी तरह से सक्षम है। लेकिन बिहार में ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट का धड़ल्ले से उलंघन हो रहा है। इसके फस्वरूप हाल में देखा गया है कि कोविड़ के दवा जैसे कि रेंडिसिविर आदि बाजार में 50हजार रुपए तक बेचे गए है ।

अस्पतालो में फार्मासिस्ट के निरीक्षण में कोविड मरीजों के इलाज ना होने के कारण, दवा के ओवर डोज से नए बीमारीया जैसे ब्लैक फंगस आदि का उत्पति हुआ है।ऐसे समय मे भी बिहार के स्वास्थ्य मंत्री का “बिहार में वेंटिलेटर हेतु सुयोग्य व्यक्ति न होने” का कुतर्क, सरकार की मंशा पर भी सवाल उठता है जबकि अन्य राज्यों में (जैसे -यू.पी.) में फार्मासिस्टों को उचित प्रशिक्षण दे कर इस कार्य के लिए तैनात किया गया है।हाल में ही देखा गया कुछ नेताओं द्वारा दवा को राशन पानी की तरह बांटा जा रहा है।भारत एंटीबायोटिक रेसीस्टेंस की समस्या में अग्रणी है और नेताओं द्वारा वितरित दवा में एंटीबायोटिक भी है, जिससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस होने की संभावना बढ़ जाती है ।। अगर नेता या सामाजिक कार्यकर्ता फार्मासिस्टों के उपस्तिथि में यह वितरण करे तो सिर्फ जरूरतमंद मरीजों को ही एंटीबायोटिक दवा और अन्य दवा दिया जाएगा।

फार्मासिस्ट दवा के अच्छे जानकार होते हैपरंतु सरकार फार्मासिस्ट की सेवा लेने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं जो कि मात्र 6 महीने के सर्टिफिकेट कोर्स किए है, और ना तो दवा के बारे विशेष जानकारी रखते है और ना ही बीमारी को पहचानने का ज्ञान है उन्हें चिकित्सीय सलाह देने के लिए न्युक्त किया गया है।। दवा के विशेषज्ञ कहे जाने वाले फार्मासिस्ट ,सरकार को कोविड महामारी में सेवा देने के लिए निवेदन करने के वावजूद अपनी सेवा नहीं दे पा रहे है और इस त्रासदी में अपने समाज और मातृभूमि को सेवा ना देने के कारण असहाय और लाचार महसूस कर रहे है।बता दें कि राज्य में सिर्फ एक औषधि जांच केंद्र है जो कि कर्मियों और उपकरणों के आभाव में निष्क्रिय है । कोरोना काल में remdisivir और अन्य दवाईयो के गुणवत्ता पर बहुत प्रश्न उठे परंतु जांच केंद्र के अभाव में उचित कार्यवाही ना हो सकी ।अगर सरकार राज्य में और भी दवा जांच केंद्र खोलकर फार्मासिस्टों की न्युक्ति कर, जांच की नकली दवाओं के कारोबार पर रोक लगाए जा सकता है।

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