कोरोना को लेकर सर्तकता: सदर अस्पताल में प्रसव पूर्व महिलाओं की हो रही है कोविड जांच

  • एंटीजन किट के माध्यम से गर्भवती माताओं की हो रही टेस्टिंग
  • कोरोना काल में भी मातृ शिशु स्वास्थ्य को किया जा रहा बेहतर
  • संस्थागत प्रसव को हीं प्राथमिकता दे रहीं महिलाएं

गोपालगंज: कोरोना काल में भी मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मुहैया कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग संकल्पित है। कोरोना संक्रमण के इस दौर में प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। प्रसव कक्ष में एंट्री से पूर्व प्रत्येक गर्भवती महिलाओं की कोविड जांच सुनिश्चित की जा रही है। उसके बाद ही अन्य ट्रीटमेंट किए जा रहें है। सदर अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में 3 डॉक्टर एवं 24 नर्स अपने – अपने कार्यों को बेहतरीन तरीके से कर रही हैं। कोरोना काल में भी संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाएं भी सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता दे रही हैं। सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देना जरूरी है। सुरक्षित प्रसव के लिए उचित स्वास्थ्य प्रबंधन बेहद जरूरी है। पीएचसी से लेकर जिला अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के लिए पूरी सुविधा उपलब्ध है । लोगों को संस्थागत प्रसव के दौरान बेहतर से बेहतर सुविधा देने के लिए शासन-प्रशासन भी पूरी तरह सजग है। संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने से ना सिर्फ सुरक्षित प्रसव होगा, बल्कि शिशु-मृत्यु दर में भी कमी आएगी। इसके लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं।

एक घंटे के अंदर मां का पहला दूध सबसे बड़ा टीका:

सिविल सर्जन डॉ. वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि नवजात के लिए एक घंटे के अंदर मां का पहला दूध सबसे बड़ा टीका होता है। पहला दूध पीला होता है। इसे अज्ञानता के कारण नहीं पिलाया जाता है। जबकि पहले दूध से कई संक्रमण से बचाव होता है। पीला गाढ़ा दूध ही बच्चों को बचाने के लिए अमृत के समान है। इससे मानसिक और शारीरिक विकास होता है। नवजात को एक घंटे के अंदर मां का पहला दूध मिल जाए तो कई तरह के इंफेक्शन का खतरा कम हो जाता है।

गर्भवती को बेहतर खान-पान के बारे में भी जानकारी :

गर्भवती को बेहतर खान-पान के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित कराने पर बल दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की चारों प्रसव पूर्व जांच माता एवं उसके गर्भस्थ शिशु की स्थिति स्पष्ट करती व संभावित जटिलताओं का पता चलता है। शिशु-मृत्यु दर में कमी के लिए बेहतर प्रसव एवं उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी है। प्रसव पूर्व जांच से ही गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती है। गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है। जिसमें प्रसव पूर्व जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जांच के प्रति महिलाओं की जागरूकता ना सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती है बल्कि, सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है।

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